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चंद्र ग्रहण 2026: क्या है, क्यों लगता है, कब होगा, भारत में दिखेगा या नहीं? जानिए पूरी जानकारी

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चंद्र ग्रहण 2026: क्या है, क्यों लगता है, कब होगा, भारत में दिखेगा या नहीं? जानिए पूरी जानकारी
फोटो: Kashi Hindi NEWS
एक नजर में
  • शीर्षक: चंद्र ग्रहण 2026: क्या है, क्यों लगता है, कब होगा, भारत में दिखेगा या नहीं? जानिए पूरी जानकारी
  • श्रेणी: other
  • स्थान: वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई खबर पढ़ें।

 

चंद्र ग्रहण 2026: क्या है, क्यों लगता है, कब होगा, भारत में दिखेगा या नहीं? जानिए पूरी जानकारी

आसमान में होने वाली खगोलीय घटनाएं हमेशा से इंसान के लिए आकर्षण का केंद्र रही हैं। इनमें चंद्र ग्रहण सबसे खूबसूरत और रोमांचक घटनाओं में से एक है। जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक विशेष स्थिति में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण दिखाई देता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है, जिसे आम तौर पर “ब्लड मून” कहा जाता है।

साल 2026 में एक पूर्ण चंद्र ग्रहण पहले ही 2-3 मार्च को हो चुका है और अब वर्ष का अगला तथा अंतिम चंद्र ग्रहण 27-28 अगस्त 2026 को होने वाला है। यह एक बहुत गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। NASA के अनुसार यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों सहित कई क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारत इस ग्रहण के दृश्य क्षेत्र में नहीं होगा।

चंद्र ग्रहण


क्या होता है चंद्र ग्रहण?

चंद्र ग्रहण उस समय होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस स्थिति में सूर्य का प्रकाश सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता और पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है।

चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के आसपास ही हो सकता है, क्योंकि इसी समय सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के लगभग विपरीत दिशा में होते हैं। हालांकि हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं लगता। इसका कारण चंद्रमा की कक्षा का पृथ्वी की कक्षा के तल से लगभग 5 डिग्री झुका होना है। इसलिए अधिकांश पूर्णिमाओं में चंद्रमा पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है।

जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा ऐसी स्थिति में आते हैं कि चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, तब ग्रहण बनता है। NASA के अनुसार पृथ्वी की छाया के मुख्य रूप से दो हिस्से होते हैं—उपछाया (Penumbra) और प्रच्छाया या गहरी छाया (Umbra)

चंद्र ग्रहण क्यों लगता है?

चंद्र ग्रहण का सबसे सरल कारण सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा का एक सीध में आना है। सूर्य प्रकाश का स्रोत है। पृथ्वी सूर्य के प्रकाश को रोकती है और उसके पीछे एक लंबी छाया बनती है। जब चंद्रमा इस छाया के क्षेत्र में पहुंचता है तो उसकी चमक कम होने लगती है।

अगर चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया यानी Umbra में पूरी तरह प्रवेश कर जाए तो पूर्ण चंद्र ग्रहण हो सकता है। यदि चंद्रमा का केवल एक हिस्सा Umbra में जाता है तो आंशिक चंद्र ग्रहण होता है। वहीं अगर चंद्रमा केवल पृथ्वी की हल्की छाया यानी Penumbra से गुजरता है तो उपच्छाया या Penumbral Lunar Eclipse दिखाई देता है।

चंद्र ग्रहण कितने प्रकार के होते हैं?

चंद्र ग्रहण को सामान्य तौर पर तीन प्रमुख श्रेणियों में समझा जाता है।

1. पूर्ण चंद्र ग्रहण

पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की Umbra यानी गहरी छाया में प्रवेश कर जाता है। इस दौरान चंद्रमा का पूरा दिखाई देने वाला हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया से प्रभावित होता है।

इस स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह गायब नहीं होता। वातावरण से होकर गुजरने वाली सूर्य की कुछ लाल-नारंगी रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है। यही कारण है कि पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल या नारंगी दिखाई दे सकता है।

2. आंशिक चंद्र ग्रहण

आंशिक चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करता है। बाकी हिस्सा अपेक्षाकृत चमकीला रहता है।

28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण इसी श्रेणी का है। हालांकि यह तकनीकी रूप से पूर्ण ग्रहण नहीं होगा, लेकिन यह बेहद गहरा आंशिक ग्रहण होगा। उपलब्ध खगोलीय गणनाओं के अनुसार चंद्रमा का लगभग 96.2 प्रतिशत हिस्सा Umbra में जाएगा, जिसके कारण यह लगभग पूर्ण चंद्र ग्रहण जैसा नजर आ सकता है।

3. उपच्छाया चंद्र ग्रहण

जब चंद्रमा केवल पृथ्वी की Penumbra से गुजरता है तो उपच्छाया चंद्र ग्रहण होता है। इसमें चंद्रमा की चमक में बदलाव बहुत हल्का हो सकता है और सामान्य दर्शक के लिए इसे पहचानना मुश्किल हो सकता है।

2026 का अगला चंद्र ग्रहण कब होगा?

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि अगला चंद्र ग्रहण कब होगा?

27-28 अगस्त 2026 की रात/तारीख को एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। अलग-अलग देशों में स्थानीय समय और तारीख के अनुसार यह 27 या 28 अगस्त को दिखाई दे सकता है। NASA इसे August 27-28, 2026 Partial Lunar Eclipse के रूप में सूचीबद्ध करता है।

यह 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण होगा। इससे पहले 2-3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण हुआ था। Timeanddate के अनुसार मार्च वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका के बड़े हिस्सों से दिखाई दिया था।

28 अगस्त का चंद्र ग्रहण कितना खास है?

28 अगस्त 2026 का ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि यह सामान्य आंशिक ग्रहण नहीं बल्कि बहुत गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा।

खगोलीय गणनाओं के अनुसार चंद्रमा का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की Umbra में पहुंच जाएगा। इसका मतलब यह है कि चंद्रमा का केवल छोटा-सा हिस्सा गहरी छाया से बाहर रहेगा।

इसी वजह से कुछ स्थानों पर चंद्रमा का दृश्य लगभग पूर्ण ग्रहण जैसा प्रभाव दे सकता है। पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर आने वाली लाल रोशनी के कारण ग्रहण के दौरान चंद्रमा के छायांकित हिस्से पर लाल-भूरा या नारंगी रंग दिखाई दे सकता है।

क्या 28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?

भारत में रहने वाले लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यही है कि 28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा।

NASA की भविष्य की ग्रहण सूची में इस ग्रहण का दृश्य क्षेत्र Americas, Europe, Africa और Western Asia बताया गया है। भारत इस दृश्य क्षेत्र में नहीं आता।

भारत में उस समय ग्रहण की मुख्य अवस्था दिन के समय होगी, जबकि चंद्रमा भारत के आसमान में क्षितिज के नीचे रहेगा। इसलिए दिल्ली, वाराणसी, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, पटना या देश के अन्य हिस्सों से इसे सीधे आसमान में देखना संभव नहीं होगा।

इसलिए भारतीय दर्शकों को इस खगोलीय घटना को देखने के लिए ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम या दूसरे देशों से उपलब्ध प्रसारण का सहारा लेना पड़ सकता है।

किन देशों में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?

NASA के अनुसार 27-28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा। पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में भी इसे देखा जा सकेगा।

Timeanddate के अनुसार यह ग्रहण उत्तर और दक्षिण अमेरिका के बड़े हिस्सों तथा यूरोप और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों से दिखाई देगा।

किसी खास शहर से ग्रहण दिखाई देगा या नहीं, यह वहां चंद्रमा के उदय-अस्त और स्थानीय समय पर निर्भर करेगा। इसलिए खगोलीय घटनाओं के लिए किसी स्थान का स्थानीय ग्रहण समय देखना अधिक सटीक तरीका होता है।

ग्रहण के समय चंद्रमा लाल क्यों दिखाई देता है?

पूर्ण या बहुत गहरे चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा के लाल दिखाई देने का कारण पृथ्वी का वातावरण है।

सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते समय अलग-अलग रंगों में बिखरती है। नीली रोशनी अपेक्षाकृत ज्यादा बिखरती है, जबकि लाल और नारंगी प्रकाश अधिक आसानी से वातावरण से गुजर सकता है।

ग्रहण के दौरान पृथ्वी के वातावरण से होकर गुजरने वाली लाल रोशनी का कुछ हिस्सा मुड़कर चंद्रमा की सतह तक पहुंचता है। इसी कारण चंद्रमा लाल, नारंगी या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है।

यही खूबसूरत दृश्य Blood Moon के नाम से लोकप्रिय है।

हालांकि 28 अगस्त का ग्रहण पूर्ण नहीं होगा, लेकिन इसकी गहराई इतनी अधिक होगी कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में रहेगा और लालिमा दिखाई देने की संभावना रहेगी।

क्या चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित है?

चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है। यह सूर्य ग्रहण से अलग है। सूर्य ग्रहण में सूर्य की सीधी रोशनी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए विशेष सुरक्षा फिल्टर की जरूरत होती है।

लेकिन चंद्र ग्रहण में आप चंद्रमा को सीधे देख सकते हैं। NASA और खगोलीय स्रोतों के अनुसार इसके लिए सूर्य ग्रहण वाले विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती।

हालांकि दूरबीन या binoculars का इस्तेमाल करने से चंद्रमा की सतह और ग्रहण के चरणों को अधिक स्पष्ट देखा जा सकता है।

चंद्र ग्रहण को देखने का सबसे अच्छा तरीका

जहां ग्रहण दिखाई देगा, वहां इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है। खुला आसमान और ऐसा स्थान जहां प्रकाश प्रदूषण कम हो, बेहतर रहेगा।

अगर आप तस्वीरें लेना चाहते हैं तो tripod के साथ कैमरा या मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया जा सकता है। चंद्रमा की तस्वीरों में exposure और focus को मैनुअली नियंत्रित करने पर बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

भारत में 28 अगस्त 2026 का ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारतीय दर्शक ऑनलाइन लाइव कवरेज देख सकते हैं। NASA तथा अन्य खगोल विज्ञान प्लेटफॉर्म ग्रहण के दौरान ऑनलाइन जानकारी और कवरेज उपलब्ध करा सकते हैं। NASA ने अगस्त 2026 के skywatching कार्यक्रम में इस ग्रहण को प्रमुख खगोलीय घटना के रूप में शामिल किया है।

क्या चंद्र ग्रहण का पृथ्वी पर कोई वैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है?

चंद्र ग्रहण मूल रूप से सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की ज्यामितीय स्थिति से जुड़ी खगोलीय घटना है। इसका कोई रहस्यमय या जादुई कारण नहीं है।

ग्रहण के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की स्थिति वैज्ञानिक रूप से गणना की जा सकती है। वैज्ञानिक ग्रहण के समय, उसकी अवधि, दृश्य क्षेत्र और चंद्रमा की छाया में प्रवेश की मात्रा पहले से निर्धारित कर सकते हैं।

हालांकि चंद्रमा का पृथ्वी के समुद्रों पर ज्वार-भाटा के रूप में प्रभाव होता है, लेकिन सामान्य चंद्र ग्रहण को मानव स्वास्थ्य, भाग्य या रोजमर्रा की जिंदगी पर किसी विशेष वैज्ञानिक प्रभाव से जोड़ने का ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

चंद्र ग्रहण और भारतीय परंपराएं

भारत में चंद्र ग्रहण का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी रहा है। कई परिवारों में ग्रहण से पहले और बाद में स्नान, पूजा-पाठ, मंत्र जाप तथा भोजन से जुड़े पारंपरिक नियमों का पालन किया जाता है।

सूतक काल जैसी मान्यताएं भी भारतीय धार्मिक परंपरा का हिस्सा हैं। हालांकि इनका संबंध धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं से है, इन्हें वैज्ञानिक खगोलीय तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

28 अगस्त 2026 का ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में सूतक को लेकर अलग-अलग पंचांग और धार्मिक परंपराओं में जो नियम बताए जाएं, उन्हें धार्मिक मान्यता के संदर्भ में समझना चाहिए, वैज्ञानिक नियम के रूप में नहीं।

2026 में पहले कब लगा था चंद्र ग्रहण?

2026 में पहला चंद्र ग्रहण 2-3 मार्च को हुआ था। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण था और कई देशों में इसे Blood Moon के रूप में देखा गया।

Timeanddate के अनुसार मार्च 2026 का पूर्ण चंद्र ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका सहित कई क्षेत्रों में दिखाई दिया था।

इस तरह 2026 में आकाश प्रेमियों को दो अलग-अलग प्रकार के चंद्र ग्रहण देखने को मिल रहे हैं—पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण और दूसरा गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण।

2027 में अगला चंद्र ग्रहण कब होगा?

28 अगस्त 2026 के बाद अगला सूचीबद्ध चंद्र ग्रहण 20-21 फरवरी 2027 को होगा। NASA के अनुसार यह Penumbral Lunar Eclipse, यानी उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा। इसकी दृश्यता Americas, Europe, Africa, Asia, Australia और Antarctica के विभिन्न हिस्सों तक होगी।

इसके बाद आने वाले वर्षों में भी कई चंद्र ग्रहण होंगे, लेकिन उनकी दृश्यता हर देश और शहर से अलग हो सकती है।

चंद्र ग्रहण कितनी देर तक रहता है?

चंद्र ग्रहण की पूरी प्रक्रिया कई घंटे तक चल सकती है। लेकिन जिस समय चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में होता है, वह अवधि इससे कम होती है।

28 अगस्त 2026 का ग्रहण विशेष रूप से गहरा आंशिक ग्रहण है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार इसकी Penumbral और Partial phases कई घंटे तक चलेंगी, लेकिन किसी खास स्थान से दिखाई देने वाली अवधि उस स्थान के क्षितिज और चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करेगी।

क्या चंद्र ग्रहण दुर्लभ घटना है?

चंद्र ग्रहण बहुत असामान्य घटना नहीं है, लेकिन किसी खास शहर से पूर्ण चंद्र ग्रहण देखना अपेक्षाकृत दुर्लभ हो सकता है।

हर पूर्णिमा पर ग्रहण इसलिए नहीं लगता क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा के तल से झुकी हुई है। केवल तब ग्रहण की स्थिति बनती है जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा पृथ्वी की छाया के उचित क्षेत्र के पास पहुंचता है।

NASA के अनुसार साल में कुछ विशेष eclipse seasons होते हैं, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की ज्यामितीय स्थिति ग्रहणों के लिए अनुकूल बनती है।

भारत के लिए क्या है सबसे जरूरी जानकारी?

भारतीय दर्शकों के लिए 28 अगस्त 2026 के चंद्र ग्रहण की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे भारत से सीधे नहीं देखा जा सकेगा

ग्रहण के समय भारत में दिन होगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। इसलिए वाराणसी, दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, पटना या किसी अन्य भारतीय शहर से इसे आसमान में देखने का अवसर नहीं मिलेगा।

अगर कोई व्यक्ति इस घटना को देखना चाहता है तो ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम सबसे आसान विकल्प होगा।

निष्कर्ष

चंद्र ग्रहण प्रकृति की एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जिसमें पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर अपनी छाया चंद्रमा पर डालती है। इसका स्वरूप पूर्ण, आंशिक या उपच्छाया ग्रहण के रूप में दिखाई दे सकता है।

27-28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण वर्ष 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण होगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं बल्कि लगभग पूर्णता के करीब पहुंचने वाला एक बेहद गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। चंद्रमा का लगभग 96.2 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करेगा।

इस खगोलीय घटना का सबसे अच्छा दृश्य उत्तर और दक्षिण अमेरिका तथा यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से देखने को मिलेगा। NASA भी इसे अगस्त 2026 की प्रमुख skywatching घटनाओं में शामिल कर रहा है।

भारत में रहने वाले लोगों के लिए निराशाजनक बात यह है कि यह ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। लेकिन इंटरनेट के माध्यम से इसकी लाइव कवरेज देखी जा सकती है।

चंद्र ग्रहण हमें यह याद दिलाता है कि पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य लगातार गति में हैं और उनकी कक्षाओं के बीच बनने वाली सटीक ज्यामितीय परिस्थितियां आसमान में ऐसे अद्भुत दृश्य पैदा करती हैं। विज्ञान की मदद से आज इन घटनाओं का समय और दृश्य क्षेत्र पहले से जाना जा सकता है—और यही आधुनिक खगोल विज्ञान की सबसे रोमांचक उपलब्धियों में से एक है।

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