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बाबतपुर एयरपोर्ट का नया डिजाइन कैसा होगा? 2,870 करोड़ की परियोजना में क्या-क्या बदलेगा, कितनी जमीन लगेगी और अब तक कितना काम हुआ

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What will the new design of Babatpur Airport look like? What changes will the ₹2,870 crore project entail, how much land will be required, and how muc
फोटो: Kashi Hindi NEWS
एक नजर में
  • शीर्षक: बाबतपुर एयरपोर्ट का नया डिजाइन कैसा होगा? 2,870 करोड़ की परियोजना में क्या-क्या बदलेगा, कितनी जमीन लगेगी और अब तक कितना काम हुआ
  • श्रेणी: varanasi
  • स्थान: वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई खबर पढ़ें।

 

बाबतपुर एयरपोर्ट का नया डिजाइन कैसा होगा? 2,870 करोड़ की परियोजना में क्या-क्या बदलेगा, कितनी जमीन लगेगी और अब तक कितना काम हुआ

वाराणसी का बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट आने वाले समय में सिर्फ बड़ा हवाई अड्डा नहीं, बल्कि काशी की पहचान को आधुनिक विमानन सुविधाओं के साथ जोड़ने वाला नया प्रवेश द्वार बनने जा रहा है। करीब 2,870 करोड़ रुपये की स्वीकृत विस्तार परियोजना में नया टर्मिनल भवन, रनवे विस्तार, नया एप्रन, समानांतर टैक्सी ट्रैक और दूसरी एयरसाइड सुविधाएं शामिल हैं। परियोजना पूरी होने के बाद एयरपोर्ट की वार्षिक यात्री क्षमता मौजूदा करीब 39 लाख से बढ़कर 99 लाख हो जाएगी।

सबसे दिलचस्प हिस्सा इसका नया टर्मिनल है। करीब 75,000 वर्गमीटर में बनने वाला भवन काशी की सांस्कृतिक पहचान से प्रेरित होगा। उपलब्ध परियोजना विवरणों में काशी विश्वनाथ मंदिर की वास्तुकला और काशी की विरासत को डिजाइन का आधार बताया गया है। प्रस्तावित टर्मिनल में 72 चेक-इन काउंटर, आठ एयरोब्रिज, आधुनिक बैगेज सिस्टम और मल्टीलेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

लेकिन इस विकास की दूसरी तस्वीर भी है। एयरपोर्ट विस्तार के लिए करीब 350 एकड़ अतिरिक्त जमीन जुटाई जा रही है। जमीन अधिग्रहण से आसपास के कई गांवों और परिवारों पर असर पड़ा है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है—इस परियोजना से किसे फायदा होगा और किसकी कीमत पर यह विस्तार हो रहा है?

What will the new design of Babatpur Airport look like? What changes will the ₹2,870 crore project entail, how much land will be required, and how much work has been completed so far?


आखिर बाबतपुर एयरपोर्ट में क्या बनने जा रहा है?

यह परियोजना केवल नया टर्मिनल बनाने तक सीमित नहीं है। इसका पूरा उद्देश्य एयरपोर्ट के landside और airside infrastructure को एक साथ मजबूत करना है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून 2024 में करीब 2,869.65 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च वाली परियोजना को मंजूरी दी थी। इसमें नया टर्मिनल, रनवे का विस्तार, एप्रन का विस्तार, समानांतर टैक्सी ट्रैक और अन्य संबंधित कार्य शामिल हैं।

अभी एयरपोर्ट की यात्री क्षमता करीब 39 लाख यात्री प्रति वर्ष है। विस्तार के बाद इसे करीब 99 लाख यात्री सालाना तक ले जाने का लक्ष्य है।

इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में बाबतपुर एयरपोर्ट मौजूदा क्षमता के मुकाबले लगभग ढाई गुना यात्रियों को संभाल सकेगा।

यह विस्तार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2025-26 में एयरपोर्ट से करीब 42.8 लाख यात्रियों के यात्रा करने का अनुमान बताया गया था। यानी मौजूदा क्षमता पर दबाव पहले ही बढ़ चुका है।

नया टर्मिनल कैसा दिखाई देगा?

नए टर्मिनल का सबसे खास पहलू उसकी वास्तुकला है। इसका डिजाइन काशी की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से प्रेरित रखा गया है।

एयरपोर्ट अथॉरिटी से संबंधित परियोजना दस्तावेजों में नए टर्मिनल के डिजाइन को काशी विश्वनाथ मंदिर की वास्तुकला से जोड़ा गया है। बाद की परियोजना जानकारी में भगवान शिव के त्रिशूल और काशी विश्वनाथ धाम की स्थापत्य शैली से प्रेरणा की बात सामने आई है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि एयरपोर्ट किसी मंदिर की हूबहू प्रतिकृति होगा। उद्देश्य आधुनिक एयरपोर्ट की जरूरतों के साथ काशी की पहचान को वास्तुशिल्प में शामिल करना है।

यात्रियों के लिए इसका अनुभव प्रवेश द्वार से लेकर टर्मिनल के अंदर तक काशी की संस्कृति से जुड़ा हो सकता है। काशी के घाट, स्थानीय कला और धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों को एयरपोर्ट के passenger experience का हिस्सा बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

75 हजार वर्गमीटर का टर्मिनल, 72 चेक-इन काउंटर

नया टर्मिनल भवन करीब 75,000 वर्गमीटर क्षेत्र में बनाया जा रहा है। कुछ हालिया परियोजना विवरणों में इसका क्षेत्रफल लगभग 75,600 वर्गमीटर बताया गया है।

इसकी सालाना यात्री क्षमता करीब 60 लाख होगी और peak hour में करीब 5,000 यात्रियों को संभालने के लिए इसे डिजाइन किया गया है।

टर्मिनल में करीब 72 चेक-इन काउंटर और आठ एयरोब्रिज प्रस्तावित हैं। आधुनिक बैगेज हैंडलिंग सिस्टम और मल्टीलेवल पार्किंग भी परियोजना का हिस्सा हैं।

यानी नया भवन केवल बड़ा हॉल नहीं होगा। इसका मकसद check-in से लेकर security, baggage और boarding तक पूरी यात्री प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित करना है।

एक और बदलाव घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संचालन से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विस्तार के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अलग-अलग हिस्सों से संचालित करने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे यात्रियों और एयरपोर्ट कर्मचारियों के लिए संचालन आसान होने की उम्मीद है।

रनवे की लंबाई 2,745 से बढ़कर 4,075 मीटर होगी

परियोजना का दूसरा बड़ा हिस्सा रनवे है।

मौजूदा रनवे करीब 2,745 मीटर लंबा है। विस्तार के बाद इसकी लंबाई लगभग 4,075 मीटर हो जाएगी और चौड़ाई 45 मीटर रखी गई है।

करीब 1,330 मीटर का यह अतिरिक्त विस्तार एयरपोर्ट की क्षमता में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। लंबा रनवे बड़े और भारी विमानों के संचालन के लिए ज्यादा अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराता है।

यही कारण है कि इस परियोजना को केवल passenger terminal expansion के रूप में देखना सही नहीं होगा। इसका एक बड़ा हिस्सा विमान संचालन की क्षमता बढ़ाने से जुड़ा है।

इसके साथ नया एप्रन भी बनाया जा रहा है। परियोजना में 20 विमानों की पार्किंग क्षमता वाला नया एप्रन प्रस्तावित है।

रनवे के नीचे से गुजरेगा हाईवे

बाबतपुर एयरपोर्ट विस्तार की सबसे असामान्य परियोजनाओं में से एक रनवे से जुड़ा अंडरपास/टनल है।

रनवे विस्तार के रास्ते में राष्ट्रीय राजमार्ग आता है। इसे हटाने या पूरी तरह दूसरी दिशा में ले जाने के बजाय हाईवे के एक हिस्से को रनवे के नीचे से गुजारने की योजना बनाई गई है।

इसका निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी परियोजना के तहत किया जा रहा है। इससे भविष्य में विमान रनवे के ऊपर और सड़क यातायात नीचे अलग-अलग स्तर पर चल सकेगा।

इस व्यवस्था का महत्व इसलिए भी है क्योंकि रनवे को 4,075 मीटर तक बढ़ाने के लिए जमीन और सड़क के alignment को साथ में हल करना जरूरी था।

इस अंडरपास की लागत को बाबतपुर एयरपोर्ट की 2,869.65 करोड़ रुपये की मुख्य स्वीकृत परियोजना से अलग समझना चाहिए, क्योंकि इसका निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित कार्य के रूप में किया जा रहा है।

कुल कितनी जमीन ली जाएगी?

यही इस परियोजना का सबसे संवेदनशील हिस्सा है।

एयरपोर्ट की विस्तार योजना के लिए लगभग 350 एकड़ अतिरिक्त जमीन की जरूरत है। एयरपोर्ट अथॉरिटी से संबंधित नियामकीय दस्तावेजों के अनुसार इस 350 एकड़ में टर्मिनल और रनवे विस्तार दोनों के लिए जमीन शामिल है।

एक चरण में बताया गया था कि रनवे विस्तार के लिए लगभग 260 एकड़ जमीन की आवश्यकता है, जबकि टर्मिनल और अन्य सुविधाओं के लिए अलग जमीन चाहिए।

एयरपोर्ट का विस्तारित परिसर कुल मिलाकर करीब 774 एकड़ तक पहुंचने की योजना से जुड़ा है। इसमें मौजूदा और विस्तार के बाद की जमीन शामिल है।

यानी यह सिर्फ कुछ एकड़ में नया भवन खड़ा करने वाली परियोजना नहीं है। इसका असर आसपास के गांवों की जमीन, सड़क व्यवस्था और आबादी पर भी पड़ता है।

किन गांवों और परिवारों पर असर पड़ा?

भूमि अधिग्रहण के दौरान बाबतपुर के आसपास के कई गांव प्रभावित हुए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में करमी, बैकुंठपुर, सगुनहा, पूरा रघुनाथपुर, मंगारी, घमहापुर और बसनी जैसे गांवों की जमीन का उल्लेख मिलता है।

2025 में सामने आई जानकारी के अनुसार करीब 337 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हो चुका था और लगभग 857 लोग प्रभावित बताए गए थे।

यह आंकड़ा उस समय की अधिग्रहण स्थिति से जुड़ा है। इसे अगस्त 2026 की अंतिम प्रभावित परिवारों की संख्या नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि पुनर्वास, मुआवजा और शेष भूमि संबंधी प्रक्रियाएं अलग-अलग चरणों में चल सकती हैं।

हालिया समय में विस्थापित परिवारों के नए स्थानों पर बिजली कनेक्शन से संबंधित काम के लिए भी प्रक्रिया सामने आई है। इससे यह स्पष्ट है कि परियोजना का सामाजिक असर केवल जमीन के कागजी अधिग्रहण तक सीमित नहीं है।

किसका नुकसान हो सकता है?

सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ा है जिनकी जमीन या संरचना एयरपोर्ट विस्तार की सीमा में आई है।

किसी किसान या परिवार के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं होती। उससे खेती, घर, रोजगार और स्थानीय सामाजिक संबंध जुड़े होते हैं। इसलिए उचित मुआवजा मिलने के बावजूद विस्थापन की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती।

दूसरा असर आसपास के गांवों पर निर्माण अवधि के दौरान पड़ सकता है। भारी मशीनें, निर्माण सामग्री, यातायात और रास्तों में बदलाव स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही को प्रभावित कर सकते हैं।

तीसरा सवाल भविष्य का है। एयरपोर्ट बड़ा होने के बाद आसपास जमीन की कीमत, व्यावसायिक गतिविधि और विकास तेजी से बदल सकते हैं। इससे कुछ लोगों को आर्थिक फायदा होगा, लेकिन छोटे स्थानीय कारोबार या पारंपरिक भूमि उपयोग करने वाले परिवारों पर दबाव भी बढ़ सकता है।

इसलिए परियोजना का मूल्यांकन केवल करोड़ों रुपये के निवेश से नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और स्थानीय क्षेत्र के संतुलित विकास से भी किया जाना चाहिए।

किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा?

सबसे पहला फायदा यात्रियों को मिलने की उम्मीद है।

बढ़ती उड़ानों के बीच बड़ा टर्मिनल यात्रियों को ज्यादा जगह और बेहतर processing capacity देगा। लंबे रनवे और नए एप्रन से एयरसाइड क्षमता भी बढ़ेगी।

दूसरा फायदा पर्यटन को हो सकता है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम, सारनाथ और आसपास के धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों के कारण देश-विदेश से लगातार यात्री आते हैं। बेहतर एयर कनेक्टिविटी से पर्यटन उद्योग को अतिरिक्त क्षमता मिल सकती है।

तीसरा लाभ व्यापार और कार्गो क्षेत्र को मिल सकता है। बाबतपुर में 8,800 वर्गमीटर का एकीकृत एयर कार्गो टर्मिनल पहले से मौजूद है, जिसके जरिए किसानों के उत्पादों को खाड़ी देशों तक भेजने में मदद मिल रही है। विस्तार से एयर कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों को और मजबूती मिलने की संभावना है।

चौथा असर रोजगार पर पड़ सकता है। एयरपोर्ट बड़ा होने का मतलब केवल एयरलाइंस में नौकरी नहीं है। टैक्सी, होटल, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा, सफाई, खानपान, पर्यटन और स्थानीय व्यापार जैसी गतिविधियों में भी मांग बढ़ सकती है।

अभी कितना काम हुआ है?

अगस्त 2026 तक परियोजना स्पष्ट रूप से निर्माण चरण में है, लेकिन पूरे प्रोजेक्ट का कोई एक आधिकारिक प्रतिशत सार्वजनिक स्रोतों में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना कि परियोजना 60, 70 या 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है, बिना आधिकारिक आंकड़े के उचित नहीं होगा।

हालांकि इतना स्पष्ट है कि नया टर्मिनल निर्माणाधीन है और रनवे विस्तार का काम भी जमीन पर चल रहा है।

24 जून 2026 को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने नए टर्मिनल के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की थी और संबंधित एजेंसियों को अगले छह महीने में काम पूरा करने के लिए तेजी लाने का निर्देश दिया था।

17 अगस्त 2026 को मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने भी रनवे विस्तार कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया और विस्तार की सीमा में आ रहे अवरोधक ढांचों को हटाने के निर्देश दिए।

इससे पता चलता है कि अगस्त के अंत तक काम सिर्फ कागज पर नहीं था; टर्मिनल और रनवे दोनों पर वास्तविक निर्माण गतिविधियां जारी थीं।

काम पूरा होने की तारीख में क्यों दिखता है अंतर?

यहां पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।

परियोजना के पहले के आधिकारिक विवरण में पूरा विस्तार 2027 तक पूरा होने की योजना बताई गई थी। एयरपोर्ट अथॉरिटी की दिसंबर 2025 की जानकारी में नए टर्मिनल के पूरा होने की समयसीमा जुलाई 2027 बताई गई थी।

लेकिन जून 2026 में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने निर्माण एजेंसियों को टर्मिनल का काम तेजी से करते हुए दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया।

इसलिए दिसंबर 2026 को फिलहाल त्वरित लक्ष्य समझना चाहिए, जबकि 2027 पहले की परियोजना समयसीमा से जुड़ा है। निर्माण की वास्तविक पूर्णता तभी मानी जाएगी जब संबंधित काम, परीक्षण और परिचालन संबंधी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी।

विस्तार के बाद बाबतपुर एयरपोर्ट में क्या बदलेगा?

एक नजर में भविष्य का बाबतपुर एयरपोर्ट कुछ इस तरह समझा जा सकता है—

  • परियोजना लागत: करीब 2,869.65 करोड़ रुपये

  • अतिरिक्त भूमि: करीब 350 एकड़

  • विस्तारित एयरपोर्ट परिसर: लगभग 774 एकड़

  • नया टर्मिनल: करीब 75,000 वर्गमीटर

  • नए टर्मिनल की क्षमता: करीब 60 लाख यात्री प्रतिवर्ष

  • कुल एयरपोर्ट क्षमता: करीब 99 लाख यात्री प्रतिवर्ष

  • रनवे: 4,075 मीटर × 45 मीटर

  • नया एप्रन: 20 विमान पार्किंग की क्षमता

  • चेक-इन काउंटर: करीब 72

  • एयरोब्रिज: आठ

  • मुख्य डिजाइन थीम: काशी की सांस्कृतिक विरासत और काशी विश्वनाथ से प्रेरणा

  • वर्तमान स्थिति: टर्मिनल और रनवे विस्तार का निर्माण जारी

  • त्वरित लक्ष्य: दिसंबर 2026

  • पहले की व्यापक समयसीमा: 2027

क्या यह विस्तार वाराणसी के लिए जरूरी था?

मौजूदा यात्री आंकड़े इस सवाल का काफी हद तक जवाब देते हैं। 2025-26 में यात्रियों की संख्या करीब 42.8 लाख तक पहुंचने का अनुमान बताया गया, जबकि मौजूदा स्वीकृत क्षमता करीब 39 लाख है।

यानी एयरपोर्ट की मांग उसकी मौजूदा क्षमता के आसपास या उससे ऊपर पहुंच रही है।

ऐसे में यदि वाराणसी को आने वाले वर्षों में ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी, पर्यटन, व्यापार और कार्गो गतिविधियों का केंद्र बनना है तो एयरपोर्ट का विस्तार तार्किक आवश्यकता बन जाता है।

लेकिन विकास का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जिन परिवारों ने जमीन दी है, उनके पुनर्वास और भविष्य की आजीविका को मजबूत करना परियोजना की सफलता का अहम हिस्सा रहेगा।

निष्कर्ष

बाबतपुर एयरपोर्ट का विस्तार वाराणसी के विमानन ढांचे में बड़ा बदलाव लाने वाली परियोजना है। करीब 2,870 करोड़ रुपये के निवेश से नया 75 हजार वर्गमीटर का टर्मिनल, 4,075 मीटर का रनवे, नया एप्रन और आधुनिक टैक्सी ट्रैक जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यात्री क्षमता करीब 39 लाख से बढ़कर 99 लाख सालाना होने का लक्ष्य है।

लेकिन इस परियोजना की पूरी कहानी केवल नए टर्मिनल और चमकदार डिजाइन की नहीं है। करीब 350 एकड़ अतिरिक्त जमीन जुटाने के कारण आसपास के गांवों और परिवारों पर भी असर पड़ा है। इसलिए असली सफलता तब मानी जाएगी जब यात्रियों को बेहतर सुविधा और वाराणसी को पर्यटन-व्यापार का लाभ मिलने के साथ प्रभावित परिवारों को भी उचित मुआवजा, पुनर्वास और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मिले।

अगस्त 2026 तक टर्मिनल और रनवे का निर्माण जारी है। दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का तेज लक्ष्य दिया गया है, जबकि पहले की परियोजना समयसीमा 2027 तक थी। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि काशी का नया हवाई द्वार तय समय में कितना तैयार हो पाता है और उसका वादा किया गया आधुनिक, सांस्कृतिक और हरित स्वरूप जमीन पर कितना दिखाई देता है।

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